अनार खेती लाखों की कमाई जानकारी FARMERS

अनार एक फल है जो अनारदाना वृक्ष —-•(Punica granatum) से प्राप्त होता है। यह फल प्राथमिक रूप से दक्षिण एशिया का निवासी है, लेकिन यह अब विभिन्न भागों में पूरे विश्व में पाया जाता है। अनार फल के रूप में बहुत प्रसिद्ध है, लेकिन इसके अलावा इसके बीज, रस, छिलका और पत्तियाँ भी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में उपयोग होते हैं।अनार फल छोटे विकसित बीजधारी और लाल या गुलाबी रंग की बीजों के अंदरीय बीजों से गठित होता है। इसका स्वाद मीठा और ताजगी भरा होता है। यह एक पौष्टिक फल है जिसमें विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम, एंटीऑक्सिडेंट्स और फाइबर पाया जाता है। यह पाचन तंत्र को सुधारता है, मधुमेह को नियंत्रित करता है, हृदय स्वास्थ्य को बढ़ाता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है।अनार के बाहरी छिलके का रस और छिलका उष्ण, वट्ट और तापक गुणों के कारण इंफेक्शनों के इलाज में उपयोग होता है।

इसका बीजअनार की खेती के लिए उचित मिट्टी चुनना महत्वपूर्ण हैं

1. मिट्टी का पh (pH) स्तर: अनार के लिए उचित मिट्टी का pH स्तर 6.0 से 7.0 होना चाहिए। यदि मिट्टी का pH स्तर अधिक है, तो उपयुक्त संशोधन के माध्यम से इसे संतुलित किया जा सकता है।

2. ड्रेनेज क्षमता: मिट्टी की अच्छी ड्रेनेज क्षमता होनी चाहिए ताकि पानी ठहरने का खतरा न हो और पेड़ों की जड़ें ठंड न जाएं।

3. पोषक तत्वों की उपलब्धता: मिट्टी में पोषक तत्वों की समृद्धता होनी चाहिए, जिसमें नाइट्रोजन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और मिश्रण खनिजों की अच्छी मात्रा हो।

4. मिट्टी का संरचना: उचित मिट्टी गाड़ा होनी चाहिए, जिससे वृद्धि दर्द से फलों की उत्पादनता में सुधार होता है। इसके लिए, अधिक मात्रा में रेत या कच्चे मिट्टी को तैयार करके मिट्टी को मशालेदार और छिलके वाली बन।

अनार वृक्षों की खेती के लिए उचित खाद का उपयोग

। यह सुनिश्चित करेगा कि पौधों को पोषण मिलता है और उत्पादकता में सुधार होता है। निम्नलिखित खाद पदार्थों का उपयोग आप अपनी अनार खेती में कर सकते हैं:1. गोबर खाद: गोबर खाद एक प्रमुख जीवाणुरोधी है और इसमें मिट्टी के गुणों को सुधारने की क्षमता होती है। यह मिट्टी को मात्रात्मक कार्बन, नाइट्रोजन, पोटैशियम और फॉस्फोरस प्रदान करती है।

2. खाद संयंत्रों की खाद: खाद संयंत्रों जैसे नीम, कालीखड़ी, पुदीना, आदि की खाद भी अनार वृक्षों के लिए उपयोगी हो सकती है। इनमें पोषक तत्वों की समृद्धता होती है और मिट्टी को स्वस्थ रखती है।

3. केमिकल खाद: यदि आवश्यकता हो तो समय-समय पर आप केमिकल खाद का भी उपयोग कर सकते हैं। उचित मात्रा में नाइट्रोजन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और अन्य मिश्रण खनिजों के उपयोग से पौधों को पोषण मिलेगा।खाद क।

अनार खेती में विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाव के लिए

निम्नलिखित उपायों का पालन कर सकते हैं:1. स्वस्थ पौधों का चुनाव: स्वस्थ और प्रतिरोधी पौधे चुनना बहुत महत्वपूर्ण है। रोग प्रतिरोधी जातियों को पसंद करें और विकासशील पौधे बढ़ाएं।

2. सुरक्षा के नियमों का पालन: रोगों के प्रसार को रोकने के लिए, फसल में उचित समय पर वायुमंडलीय और जलीय समस्याओं का समाधान करें। नियमित रूप से वायुमंडलीय और जलीय वातावरण का मानिटरिंग करें।

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. बीमारी प्रबंधन: रोगों के लिए फसल संरक्षण उपयोग करें। उपयुक्त फंगीसाइड और इंसेक्टिसाइड का उपयोग करके फसल की सुरक्षा करें। नियमित रूप से बीमारी प्रबंधन की जांच करें और रोगों के संकेतों को पहचानें।4. स्वच्छता और हाइजीन: फसल के आसपास साफ-सफाई रखें और रोग प्रसार करने वाले अंकुरों, बिजों और पौधों को समय पर हटाएं।5. प्राकृतिक रोगनाशी औषधियाँ: प्राकृतिक रोगनाशी

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